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This Blog is related to blogger's academic life specially related with his research field (Computational Sanskrit & Kashmir Shavism). It explores Computaional aspects of Sanskrit and also the theology, philosophy and tradition from the viewpoint of various schools, texts, and teachers of Kashmir Shaiva Philosophy.It contains the comparative cosmological views of Sankhya & KS. This blog also reflects the blogger's personal experience with
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Monday, 24 May, 2010

WAVES से Waves तक

दोस्तों,
आज मैं आपलोगों से कुछ ऐसा शेयर करने जारहा हूं जो आप सभी के जीवन में भी अक्सर घटित होता होगा पर कदाचित व्यक्त नहीं हो पाता है। आप सभी कुछ काम बडी तन्मयता से करते हैं पर जो उसे अन्तिम रूप देने बाला होता है वह उसे पसन्द नहीं करता ..... आप विवश....।

मैं कुल तीन माह १७ दिन १ शोधपत्र के साथ बिता दिया इस उम्मीद के साथ कि गुणात्मक रूप से यह श्रेष्ठ रहे। इस कारण मैं अपनें व्यक्तिगत जीवन का भी उस अबधि हेतु उत्सर्ग कर दिया.....।

दरासल इससे पूर्व भी डार्टमाउथ (यू.एस.ए) एवं सिंगापूर में शोधपत्र प्रस्तुति निमित्त स्वीकृत हुआ था पर उचित अवसर न होने के कारण यात्रा स्थगित करनी पडी थी।

इस बार यह पत्रक त्रिनिदाद हेतु स्वीकृत हुआ है अगस्त में होना है अस्तु मैं प्रक्रिया हेतु आगे बढा पर अनुमतिप्रदाताओं को कदाचित ........।

जो भी हो मुझे अनुमति नहीं मिली। दुःख इस बात की नहीं कि मुझे अनुमति नहीं मिली दुःख इस बात का हुआ कि कम से कम शोधपत्र विषयगत किसी Expert से यह तो जान लिया जाना चाहिये था कि शोधपत्र की गुणवत्ता का स्तर क्या है , यदि वे ठीक नही मानते तो मै स्वयं ही सुधार का मार्ग देखता।

उक्त घटना कदाचित प्रथम बार इस कदर हतोत्साहित किया कि.....

पर कोई बात नहीं ................
ये तो जीवन का एक हिस्सा मात्र है......

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